शुक्रवार, 18 अगस्त 2017

जो चुप हैं , वे हैं अपराधी

देखिये अँधेरा है घना 
रौशनी को है लाना
अच्छी नहीं ये ख़ामोशी 
जो चुप हैं , वे हैं अपराधी 

बोलेंगे नहीं आप तो 
बोलेगा कौन 
कब तक रहेंगे आप 
दमन पर मौन 
स्थिति नहीं यह सीधी सादी
जो चुप हैं , वे हैं अपराधी 


रोटी का हल मिला अभी कहाँ 
रौशनी की मंजिल मिली अभी कहाँ 
जस के तस हैं हालात अब यहाँ 
बचेंगे आप कब तक यहाँ 
तटस्थता है भीषण बर्बादी 
जो चुप हैं, वे हैं अपराधी 

बाढ़ है बीमारी है 
है कितनी बेगारी 
जनता कोसती किस्मत को 
कितनी है लाचारी 
बोलो अब तो बोलो 
अच्छी नहीं यह आपाधापी 
जो चुप हैं, वे हैं अपराधी 


मर गए जो बच्चे पूछो उनसे 
कितनी थी तकलीफ 
उनकी माओं से पूछो 
लाश है जिनके पीठ 
धिक्कार है ऐसी आबादी 
जो चुप हैं, वे हैं अपराधी 

सोमवार, 14 अगस्त 2017

यह देश तुम्हारा नहीं

मेरे बच्चो
यह देश युवा है
युवाओं का है
युवा हैं इनके सपने
सपनो में उन्माद है
 यह देश तुम्हारा नहीं है
मेरे बच्चो !

इस देश से मत मांगो रोटी
मत मांगो कपडे
मत मांगो किताबें
यह सब तुम्हारा अधिकार नहीं है
तुम्हारा अधिकार हाशिये पर से
ताली बजाना है
यह देश तुम्हारा नहीं
मेरे बच्चो !

हमें मिसाइल बनानी है
हमारी प्राथमिकता में युद्ध है
हमें शहरो को स्मार्ट बनाना है
हमें सड़के चौडी करनी है
इन सडको पर चलनी है
भारी भरकम गाड़ियाँ
यह देश तुम्हरा नहीं
मेरे बच्चो !

तुम मर गये ठीक हुआ
जो जिन्दा है वे भी क्या कर रहे
मलेरिया, टायफायड, तपेदिक से मर तो रहे हैं
हजारो अन्य बच्चे रोज़
लाखों कुपोषित बच्चे जीवित तो हैं
क्या कर रहे हैं वे जीवित रह कर भी
सोचती है ऐसा ही सरकार
ऐसा ही सोचते हैं अधिकारी

अच्छा हुआ जो तुम मर गये हो
मेरे बच्चे !
यह देश तुम्हारा नहीं . 

बुधवार, 9 अगस्त 2017

अधूरी आजादी




बेटी मरती कोख में 
बैठा बेटा बेरोज़गार  
कैसे मनाये आप कहें
आजादी का त्यौहार 

हाथ में जिनके हुनर 
थामे वे तलवार 
उन्मादी दुनिया में देखो
मानव का व्यवहार 
कैसे मनाये आप कहें
आजादी का त्यौहार 

खेत ऊसर हो रहे 
खेती घाटे का व्यापार
सूद का फंदा कस रहा
बदल के चेहरा साहूकार 
कैसे मनाये आप कहें 
आजादी का त्यौहार 

साल दशक कई बीते
छंटा न अन्धकार
ऊँचा होता जा रहा 
घावो का अम्बार 
कैसे मनाये आप कहें
आजादी का त्यौहार 


जल जंगल जमीन सब 
कर रहे हाहाकार 
सोई गहरी नींद में 
जनता और सरकार 
कैसे मनाये आप कहें
आजादी का त्यौहार 

जन जन को बाँटने का 
फूल रहा कारोबार
हवा पानी धूप पर
बिठाये अपने पहरेदार
कैसे मनाये आप कहें 
आजादी का त्यौहार

सबको रोटी सबको पानी
सेहत अक्षर का अधिकार
बस इतना सा मांगे देश 
निरुत्तर क्यों सरकार
कैसे मनाएं आप कहें
आजादी का त्यौहार। 

बुधवार, 2 अगस्त 2017

संसद में प्रश्न




घट गई खेती 
मिट गये किसान
नहीं पूछा गया संसद में इसके बारे में कोई प्रश्न 


स्कूल कालेज से निकल 
सड़क और कारखानों के बीच 
धक्का खाते युवाओं पर भी 
नहीं पूछा गया संसद में कोई प्रश्न 

इस मानसून 
बाढ़ लील गई हजारों जाने 
नदियाँ उफन कर 
गली मोहल्लों में घुस गई 
संसद के मानसून सत्र में इस बारे में भी नहीं हुआ कोई हंगामा 

इस विषय पर कभी नहीं रुकी कोई कार्यवाही कि 
अस्पतालों में डाक्टर नहीं है 
नहीं है दवाइयां 
स्त्रियाँ अब भी मरती हैं लाखों में जनते हुए बच्चा 
मरे हुए लाश को ढोने के लिए भी नहीं है एम्बुलेंस 

 
दलगत विरोधों से ऊपर उठते हुए 
सांसद ऐसे स्याह प्रश्नों को उठा नहीं खराब करना चाहते हैं 
सब्सिडी वाले कैंटीन में बने मुर्गे का जायका
जबकि आंकड़े बता रहे हैं सस्ती हो रही हैं दालें, गेंहूं  आदि आदि।