बुधवार, 18 अप्रैल 2018

तुम प्रकृति हो

प्रकृति 
सबको देती है इतनी शक्ति
कि वह अपनी स्थिति का सामना कर सके
रेगिस्तान में देती है 
ताप सहने की शक्ति 
समंदर में देती है 
लहरों से जूझने की कला 
पहाड़ों में देती है 
पत्थर से लड़ने का माद्दा
जितना ताप सहते हैं हम 
जितना तैरते हैं हम 
जितना लड़ते हैं पत्थरों से 
उतनी ही पुख्ता होती है हमारी क्षमता !
कितनी ही विषमताओं से गुज़रते हुए 
आई हैं तुम में है कुछ अद्भुद शक्तियां 
उन्हें भूलो नहीं , जैसे नहीं भूलता है मानव चलना, बोलना
तुम प्रकृति हो !

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जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं ज्योति !

गुरुवार, 12 अप्रैल 2018

नेपथ्य से

यह जो रंगमंच पर हो रहा है
लिखी गयी है इसकी स्क्रिप्ट कहीं और
किसी और उद्देश्य से

ये पात्र जो संवाद कर रहे हैं
सब झूठे हैं
सब बनावटी हैं
सब मुखौटे हैं

और जो हैं मंच के सबसे आगे
आरक्षित स्थानों पर
उन्हें ठीक ठीक ज्ञात है
वे निजी तौर पर जानते हैं
किसने लिखे हैं पात्रों के संवाद
किसने चुने हैं पात्रो को
और क्या अंत है इस मंच का

नेपथ्य तय करता है
मंच का वर्तमान और भविष्य !

सोमवार, 26 मार्च 2018

पतझड़

यह मौसम है
पतझड़ का

पत्ते पीले पड रहे हैं
और कमजोर भी
वे गिर रहे हैं एक एक कर
जैसे घटता है पल पल जीवन

बुजुर्गों की आँखों का सन्नाटा
और गहरा गया है
पतझड़ का पीलापन उनके चेहरे के पीलेपन को
बढ़ा रहा है और भी अधिक

एक दिन गिर जायेंगे सब स्तम्भ
जो गिरेंगे नहीं उनके अवशेष रहेंगे खंडहर के रूप में

लेकिन वृक्ष कहाँ डरता है पतझड़ से
जहाँ से गिरता है पत्ता
वही से पनपता है नया कोंपल

पतझड़ को अच्छा लगता है हारना ! 

गुरुवार, 1 मार्च 2018

रंग पर्व


आसमान में भरे हैं रंग 
धूसर ही सही लेकिन मिटटी का भी एक रंग है 
रंग हरा जब होता है खेतों का , दुनिया में होता है जीवन 
पानी को कहते हैं बेरंग लेकिन वह कर लेता है समाहित सब रंगों को 
हवा का रंग मन के रंगों से खाता है मेल 
और हाँ 
रंग दुःख का भी होता है और सुख का भी  !

रंग जो क्रोधित होते हैं, समंदर , नदियां, पहाड़ सब तोड़ते हैं मर्यादाएं व धैर्य 
ये रंग जब खुश होते हैं, होता  है रंगों का पर्व  !

जीवन के रंग किसी भी दशा में रहें उल्लसित, उत्साहित, आशन्वित 
क्योंकि  होता है आशा, उत्साह और उल्लास का भीएक रंग, लाल।  

मंगलवार, 27 फ़रवरी 2018

एक पैर का जूता

एक पैर का जूता
किसी के काम की नहीं होती
उसे किसी और जोड़े के साथ
नहीं पहना जा सकता है
क्योंकि हर जूता होता है
केवल अपने जोड़े के लिए ही।

एक साथ घिसते हैं
एक सा धूप पानी सहते हैं
एक साथ खोते हैं चमक
एक पैर का जूता खोने से
अचानक बेमानी हो जाता है
दूसरे  पैर  का जूता

जब तक साथ रहते हैं वे
कहाँ जान पाते हैं
एक दूसरे का अर्थ।


गुरुवार, 1 फ़रवरी 2018

ठीक उसी समय

जब होता है
स्कूल जाने का समय
वह ठेलता है रिक्शा
ठीक उसी समय चल रहा होता है
रेडियो पर 'बचपन बचाओ' का विज्ञापन

जब बच्चे कर रहे होते हैं
विद्यालयों में प्रार्थना
वह धो चुकी होती है
कई घरों की रात की झूठी प्लेटें
लगा चुकी होती है झाड़ू और पोंछा
ठीक उसी समय टेलीविज़न पर
साक्षात्कार दे रहा है कोई सेलिब्रिटी
"बेटी बचाओ" अभियान के बारे में


ठीक उसी समय अखबारों में
छपे होते हैं आकड़े
देश के स्कूलों में बढ़ रहे हैं
छात्रों की संख्या
सुधर रही है लैंगिक अनुपात !



गुरुवार, 18 जनवरी 2018

गणतंत्र



1
राजपथ से
जब भी निकलती है
तोपें
लहूलुहान होता है
जनपथ ।

2
जब गुजरते हैं
हवा में मारक विमान
राजपथ के ऊपर से
दुबक जाते हैं
अपने पंखों में
पक्षी।

3
घोड़े, ऊंट और
हाथियों की कदमताल पर
झूमते देश को
कहां पता होता है
राजपथ पर
लीद उठाने वालों का नाम।

4

महामहिम सब
लौट जायेंगे जब
फिर से चहक उठेंगे बच्चे
बेचने को रंगीन गुब्बारे